विशेषण • constitutional • mother • natal • radical • Natal • native | |
जन्म: birth Genesis life Nativity seed arrival nativity | |
का: presumably belonging to of by squander encode | |
जन्म का अंग्रेज़ी में
[ janma ka ]
जन्म का उदाहरण वाक्य
उदाहरण वाक्य
अधिक: आगे- A baby is God's opinion that the world should go on.
नन्हे शिशु के जन्म का अर्थ है कि भगवान यह चाहते हैं कि यह दुनिया बनी रहे. - Dr. Hazariprasad Dwivedi writes,“”In Surdas's works, he has referred to himself as a blind person and a non-achiever, but these words should not be taken at face value.“”
डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए। - Dr Hajariprasad Trivedi has written- “”from sursagar's some line says that Surdas was blind from birth and unfortunate by duty, but every time one should have belief only on words.
डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए। - Doctor Hazariprasad Dwivedi wrote - “”some of the lines of the prose Sursagar convey that Surdas called himself blind since birth and unlucky by deeds, but the meaning of the words are not in the literal sense“”
डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए। - Dr.Hazariprasad Trivedi has written-“”Through some worods contained in Sursaga, it could be inferred that though Surdas talks about himself as blind by birth and incomplete in works towards the Lord, their literal meaning is not to be taken.
डॉक्टर हजारीप्रसाद द्विवेदी ने लिखा है - सूरसागर के कुछ पदों से यह ध्वनि अवश्य निकलती है कि सूरदास अपने को जन्म का अन्धा और कर्म का अभागा कहते हैं पर सब समय इसके अक्षरार्थ को ही प्रधान नहीं मानना चाहिए। - Social evils , most of which are certainly capable of removal , are attributed to original sin , to the unalterableness of human nature , or the social structure , or -LRB- in India -RRB- to the inevitable legacy of previous births .
इन Zबुराइयों को किसी पुराने पाप का परिणाम बताया जाता है या इनके बारे में यह कहा जाता है कि इंसान की प्रकृति या सामाजिक गठन ही कुछ ऐसा है कि उसे बदला नहीं जा सकता या ( हिंदुस्तान में ) इन्हें पुराने जन्म का फल बताया जाता